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रुक्मणी नेगी: दुमका बंगर बच्चीधर्मा की सशक्त महिला प्रधान, जिन्होंने गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा

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दुमका बंगर बच्चीधर्मा – उत्तराखंड की ग्रामीण राजनीति में बहुत कम ऐसे चेहरे होते हैं, जो अपने काम से लोगों के दिलों में जगह बना पाते हैं। रुक्मणी नेगी उन्हीं में से एक हैं। वर्ष 2008 में बीटीसी सदस्य के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाली रुक्मणी नेगी ने अगले 17 वर्षों में पंचायत को एक नई दिशा देने का कार्य किया। वर्तमान में वह दुमका बंगर बच्चीधर्मा ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान हैं, और उनके द्वारा किए गए कार्यों के कारण उनकी लोकप्रियता चरम पर है।

🔷 2008 से 2013 – बीटीसी सदस्य के रूप में बुनियाद रखी

रुक्मणी नेगी ने बीटीसी सदस्य के रूप में पांच वर्षों तक पंचायत स्तर पर जनसमस्याओं से सीधे जुड़कर उनका समाधान निकाला। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, महिला समूहों और शिक्षा की दिशा में ठोस पहल की। यह वही समय था जब उन्होंने गांव के भविष्य को लेकर एक दूरदृष्टि बनानी शुरू की। गरीब और पिछड़े वर्ग के लिए पेंशन, राशन कार्ड, और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।

🔷 2013 से 2025 – ग्राम प्रधान के रूप में विकास की कहानी लिखी

2013 में जब उन्होंने ग्राम प्रधान पद की कमान संभाली, उस समय दुमका बंगर बच्चीधर्मा पंचायत कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रही थी—सड़कें टूटी थीं, पानी की व्यवस्था नहीं थी, विद्यालयों में शौचालय और फर्नीचर की कमी थी। रुक्मणी ने पहले दिन से काम शुरू किया और अपने पहले कार्यकाल में ही गांव के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करना शुरू कर दिया।

✅ सड़क निर्माण और संपर्क साधन:

उनके कार्यकाल में गांव की गलियों का पक्कीकरण हुआ, मुख्य मार्गों से संपर्क स्थापित करने वाली कई सड़कों का निर्माण पूरा हुआ। इसके चलते लोगों की आवाजाही आसान हुई, और व्यापार व शिक्षा को नई गति मिली।

✅ शिक्षा व्यवस्था में सुधार:

उन्होंने प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के लिए डेस्क-बेंच, पीने के पानी की टंकी, साफ-सफाई, और बालिकाओं के लिए अलग शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराईं। साथ ही स्थानीय शिक्षकों को प्रोत्साहित कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर दिया।

✅ स्वास्थ्य सेवाएं और महिला कल्याण:

स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सुविधाएं सुनिश्चित की गईं। आंगनबाड़ी केंद्रों का सशक्तिकरण हुआ और महिला स्वयं सहायता समूहों को योजनाओं से जोड़ा गया।

✅ पेयजल और स्वच्छता:

उनकी अगुवाई में गांव को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया। जल जीवन मिशन के तहत अधिकांश घरों तक नल द्वारा शुद्ध पेयजल पहुँचाया गया।

✅ रोजगार और स्वरोजगार:

उन्होंने कई महिलाओं को सिलाई, बुनाई, दुग्ध उत्पादन, और जैविक खेती के लिए प्रशिक्षित कर स्वरोजगार से जोड़ा। गांव में आत्मनिर्भर महिला समूहों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।




🔷 2025 के चुनाव में एकतरफा समर्थन, जीत तय मानी जा रही

ग्राम पंचायत दुमका बंगर बच्चीधर्मा में रुक्मणी नेगी की लोकप्रियता इतनी है कि 2025 के चुनावों में उनके विरोध में कोई मजबूत उम्मीदवार मैदान में नहीं आ सका है। जनता का कहना है कि यह चुनाव महज औपचारिकता रह गया है, क्योंकि जिनके नेतृत्व में गांव की शक्ल बदली, वही दोबारा कमान संभालेंगे।

ग्रामवासियों के अनुसार, रुक्मणी नेगी ने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। वे हर वर्ग, हर जाति, हर धर्म के लिए समान रूप से उपलब्ध रही हैं। यही कारण है कि महिलाएं उन्हें अपनी बहन मानती हैं, बुजुर्ग उन्हें बेटी, और युवा उन्हें नेता से ज़्यादा मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं।




🔷 निष्कर्ष: एक ग्रामीण नेता, जिनका विकास ही प्रचार है

रुक्मणी नेगी ने दिखाया है कि ग्राम स्तर पर भी यदि नेतृत्व में नीयत और नीति दोनों हो, तो कोई भी पंचायत आदर्श बन सकती है। दुमका बंगर बच्चीधर्मा पंचायत की सड़कें, स्कूल, जल व्यवस्था और महिला शक्ति इसके जीते-जागते प्रमाण हैं। उनका राजनीतिक सफर न केवल प्रशंसा के योग्य है, बल्कि आने वाले पंचायत प्रतिनिधियों के लिए एक आदर्श और सीख भी है।

2025 के चुनावों के साथ वह संभवतः तीसरी बार ग्राम प्रधान बनेंगी, और यदि ऐसा हुआ, तो यह उनके कार्यों और जनता के विश्वास की सबसे बड़ी जीत होगी।



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सुरेश उपाध्याय

संपादक चारधाम एक्सप्रेस न्यूज़

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