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सैकड़ों को श्मशान पहुंचाने वाला खंडहर में सड़ा-गला मिला

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Body of a corona warrior was found in the ruins, DDC : कोरोना चरम पर था और जब लोग अपनों की लाश को लेने से इंकार कर रहे थे तब सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल हल्द्वानी का एंबुलेंस चालक मनोज बेलवाल बिना अपनी जान की परवाह किए शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाता था। उसी मनोज ने जीवन के अंतिम दिन गुरबत में जिए। जिसने लोगों के अंतिम सफर में उनका साथ दिया, उसकी लाश रविवार को सड़ी-गली हालत में खंडहर में पड़ी मिली। मौत का पता भी तब लगा जब रोडवेज स्टेशन पर बदबू की वजह से लोगों का खड़ा होना दुश्वार होने लगा।

मूलरूप से बेतालघाट के रहने वाले 43 वर्षीय मनोज बेलवाल को बेस अस्पताल में रहने के लिए एक कमरा मिला था। वर्ष 2020 में जब कोरोना आया तो उन्होंने अकेले ही कोरोना की चपेट में आए लोगों के शव उठाए। पांच साल पहले कैंसर की वजह से उनकी पत्नी का देहांत हुआ, जिसके बाद से वह अवसाद में चले गए और शराब के आदी हो गए। ऐसे में उनकी इकलौती बेटी को उसके ननिहाल मेरठ भेज दिया गया।

वर्ष 2022 में उनका तबादला हुआ, लेकिन वह ड्यूटी ज्वाइन करने नहीं गए। इस पर तीन साल पहले उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया और बेस में मिला कमरा भी छीन लिया गया। जिसके बाद वह सड़क पर यहां-वहां रहने लगे।

रविवार को रोडवेज परिसर में तेज दुर्गंध उठने लगी। लोगों को वहां खड़ा होना मुश्किल हो गया। इस पर सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने पड़ताल की तो रोडवेज से लगी तहसील के खंडहर से मनोज की लाश बरामद की गई। भोटियापड़ाव पुलिस की सूचना पर मनोज का भाई प्रेम और चचेरा भाई भरत मौके पर पहुंचे, जिन्होंने शव की शिनाख्त की। कोतवाल राजेश कुमार यादव ने बताया कि फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। शव पुराना है और पोस्टमार्टम के बाद ही मौत की असल वजह पता लगेगी।

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सुरेश उपाध्याय

संपादक चारधाम एक्सप्रेस न्यूज़

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