हल्द्वानी में मैट्रिक्स मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉ. अजय कांडपाल और डॉ. वीरेंद्र पांगती की टीम ने एक महिला मरीज के लीवर और कॉमन बाइल डक्ट में फंसे जिंदा एस्कैरिस कृमि को ईआरसीपी और एंडोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक निकाला। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और जल्द ही डिस्चार्ज होंगी।
हल्द्वानी। मैट्रिक्स मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अजय कांडपाल और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. वीरेंद्र पांगतीकी टीम ने एक महिला मरीज के लीवर व कॉमन बाइल डक्ट (सीबीडी) में फंसे जिंदा एस्कैरिस कृमि (गोल कृमि) को ईआरसीपी और एंडोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक निकाल लिया। खास बात यह है कि मरीज खुद एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत नर्स हैं। मरीज को पिछले एक महीने से पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द था, जो पिछले 4-5 दिनों में असहनीय हो गया। रविवार को अचानक तेज उल्टी और दर्द बढ़ने पर मैट्रिक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया। डॉ. वीरेंद्र पंक्ति ने बताया कि अल्ट्रासाउंड और एमआरआई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि एक बड़ा एस्कैरिस कीड़ा आधा लीवर में और आधा कॉमन बाइल डक्ट में फंसा हुआ है।
टीम ने बिना कोई चीरा लगाए, पूरी तरह दूरबीन विधि (एंडोस्कोपी और ईआरसीपी) से कीड़े को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और जल्द डिस्चार्ज कर दी जाएंगी। हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. प्रदीप पाण्डेय ने ऑपरेटिंग टीम को बधाई देते हुए कहा, “यह अपने आप में एक दुर्लभ और जटिल केस था। आजकल दूरबीन तकनीक से लीवर, पित्ताशय, पैनक्रियास से जुड़े लगभग सभी ऑपरेशन बिना चीरा लगाए संभव हो रहे हैं। यह मरीज के लिए कम दर्द, कम रक्तस्राव, जल्दी रिकवरी और पूरी तरह सुरक्षित विधि है।”डॉ. वीरेंद्र पंक्ति ने बताया कि एस्कैरिस संक्रमण ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी व सब्जियों से आम है, लेकिन लीवर और सीबीडी में इस तरह फंसना बहुत कम देखने को मिलता है। समय पर सही डायग्नोसिस और एडवांस्ड एंडोस्कोपिक सुविधाओं के चलते मरीज की जान बचाई जा सकी।





