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“कर्ज का जाल, बच्चों की जान “आत्महत्याओं के पीछे सूदखोर माफिया” रुद्रपुर में बढ़ा सूदखोरों का आतंक।

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रुद्रपुर में सूदखोरों का आतंक: नाबालिक बच्चों को कर्ज के जाल में फंसाकर करवा रहे आत्महत्या।

शहर में ब्याज माफियाओं का आतंक लगातार गहराता जा रहा है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि अब सूदखोर नाबालिक बच्चों तक को अपने शिकंजे में फंसा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, ये ब्याज माफिया नाबालिकों की मजबूरी और शौक का फायदा उठाकर उन्हें पहले आसानी से पैसा उधार दे देते हैं। लेकिन जब किशोर इन सूदखोरों के चंगुल में फंस जाते हैं, तो उन पर मोटे ब्याज समेत रकम वसूलने का दबाव बनाया जाता है।

पैसे की अदायगी न कर पाने पर नाबालिक बच्चों को सूदखोरों की धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ता है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि कई किशोर डर और अपमान के साये में आत्महत्या करने जैसे खौफनाक कदम उठाने को मजबूर हो गए हैं।

महीनों बाद फिर सक्रिय हुए सूदखोर

बीते दिनों चर्चित चिराग अग्रवाल प्रकरण के बाद पुलिस ने ब्याज माफियाओं पर कड़ा शिकंजा कसा था। उस समय प्रशासनिक कार्रवाई के डर से कई सूदखोरों ने अपने कारोबार को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया था। लेकिन अब एक बार फिर रुद्रपुर में यह माफिया सक्रिय हो गए हैं और नाबालिक बच्चों को आसानी से कर्ज देकर उन्हें कर्ज के जाल में उलझा रहे हैं।

आवास विकास और कॉलोनियों में खुले ऑफिस

स्थानीय लोगों के मुताबिक, शहर के आवास विकास, जगतपुरा, शक्ति विहार, इंदिरा कॉलोनी और सिंह कॉलोनी जैसे इलाकों में कई ब्याज माफियाओं ने बाकायदा कार्यालय खोल रखे हैं। यहां से भोले-भाले लोगों और नाबालिक बच्चों को मोटे ब्याज पर पैसा उधार दिया जाता है। इन सूदखोरों का जाल इतना फैला हुआ है कि गरीब और मजबूर परिवार आसानी से इनके चंगुल में फंस जाते हैं।

प्रशासन मौन, बढ़ रहा आत्महत्याओं का सिलसिला

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई सिर्फ नाम मात्र की रह गई है। नाबालिक बच्चों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद ब्याज माफियाओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। लोग खुलेआम सवाल उठा रहे हैं कि आखिरकार जब इन माफियाओं के ठिकानों का पता सबको है, तो फिर प्रशासन क्यों चुप्पी साधे बैठा है।

समाज और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती

रुद्रपुर में सूदखोरों के इस खौफनाक खेल ने समाज के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर नाबालिक बच्चे शौक और दबाव के चलते इस जाल में फंस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आत्महत्याओं का सिलसिला समाज को झकझोर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन और पुलिस ने कड़ी कार्रवाई नहीं की तो आने वाले दिनों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

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सुरेश उपाध्याय

संपादक चारधाम एक्सप्रेस न्यूज़

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