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देहरादून में पानी की बड़ी योजना पर विवाद: श्मशान घाट की जमीन को लेकर अटका 4 करोड़ का प्रोजेक्ट

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देहरादून: Chandrabani क्षेत्र में पेयजल संकट दूर करने की कोशिशें अब भूमि विवाद में उलझती नजर आ रही हैं। करीब 20 हजार की आबादी को राहत देने के लिए बनाई गई पेयजल योजना महज आधा बीघा जमीन नहीं मिलने के कारण अटक गई है। पेयजल निगम की ओर से नलकूप और ओवरहेड टैंक निर्माण की तैयारी की जा रही थी, लेकिन अब योजना पर विरोध और अतिक्रमण का साया मंडराने लगा है।

जानकारी के अनुसार चंद्रबनी स्थित श्मशान घाट की करीब 52 बीघा भूमि में से कई बीघा जमीन पर अतिक्रमण होने के आरोप हैं। सूत्रों का दावा है कि पहले राजस्व अभिलेखों में श्मशान घाट के नाम लगभग 100 बीघा भूमि दर्ज थी, जो बाद में घटकर 52 बीघा रह गई। इसके बाद भी कई हिस्सों पर कब्जा होने की बात सामने आ रही है।

विश्व बैंक पोषित मेहूंवाला क्लस्टर पेयजल योजना के तहत क्षेत्र में पेयजल संकट दूर करने की योजना बनाई गई थी। पेयजल निगम ने प्रशासन से नलकूप और ओवरहेड टैंक निर्माण के लिए जमीन मांगी थी, जिस पर प्रशासन ने श्मशान घाट की बाउंड्री से सटी आधा बीघा भूमि आवंटित कर दी थी।

विरोध के बाद शुरू हुई जांच

जैसे ही निर्माण कार्य की तैयारी शुरू हुई, कुछ लोग विरोध करने पहुंच गए। उनका कहना था कि यह क्षेत्र का एकमात्र श्मशान घाट है और यहां बच्चों के शव दफनाए जाते हैं, इसलिए पेयजल योजना को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

DM Savin Bansal ने तहसील प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर जल्द रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। तहसील प्रशासन की ओर से भूमि की पैमाइश और सीमांकन का कार्य किया जा रहा है, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

चार करोड़ की DPR तैयार

पेयजल निगम के सहायक अभियंता Vinod Semwal ने बताया कि विश्व बैंक परियोजना के तहत क्षेत्र के लिए करीब चार करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है।उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में सबसे अधिक भूजल स्तर श्मशान घाट और उसके आसपास पाया गया, इसलिए वहीं नलकूप और टैंक निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था। योजना के लिए केवल आधा बीघा भूमि की आवश्यकता है।

गर्मियों में बढ़ जाती है पानी की समस्या

पूर्व पार्षद Sukhbir Butola ने कहा कि क्षेत्र में हमेशा पानी की किल्लत बनी रहती है, खासकर गर्मियों में लोगों को पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि लगातार बढ़ती आबादी के कारण लोगों को प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 100 लीटर पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसी समस्या को देखते हुए लंबे समय से नई पेयजल योजना की मांग की जा रही थी।

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सुरेश उपाध्याय

संपादक चारधाम एक्सप्रेस न्यूज़

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