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संत समाज अखाड़ों की आपत्ति के बाद जागा जिला प्रशासन
हरिद्वार : हरिद्वार जिले में बन रही जिस मस्जिद को उत्तराखंड की सबसे बड़ी निर्माण अधीन मस्जिद बताया जा रहा था उसे बनाने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति तक नहीं ली गई है। सोशल मीडिया पर इसका खूब प्रचार प्रसार किया गया कि यह उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद है, मगर जब जांच सामने आई तो यह खुलासा हुआ कि इसके निर्माण के लिए अनुमति नहीं ली गई है और इसी क्रम में जिलाधिकारी हरिद्वार ने इसका निर्माण कार्य रुकवाते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर दिया है। हरिद्वार के संत समाज ने इस बात की जानकारी प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी दी है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन हरिद्वार से इस पूरे मामले में रिपोर्ट देने को कहा है।
उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद बताई जा रही इस मस्जिद का निर्माण हरिद्वार जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र में किया जा रहा है। इस मस्जिद के मन्नर की ऊंचाई ढाई सौ फीट तक की गई है। इन दिनों इस पर पत्थर लगाए जाने का काम जोर-शोर से चल रहा था। निर्माण अधीन मस्जिद की फोटो सोशल मीडिया पर डालकर या दावा किया जा रहा था कि यह राज्य की सबसे बड़ी मस्जिद होगी।
अब जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि इतनी बड़ी मस्जिद के निर्माण के लिए मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने जिला प्रशासन से अनुमति ली ही नहीं। उच्चतम भूमि कोर्ट का ये 2009/2016 का ये निर्देश है कि किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण बिना कलेक्टर की अनुमति के नहीं कराया जा सकता, अनुमति के लिए भूमि दस्तावेज, कमेटी सदस्यों के विवरण, बैंक खातों के जानकारी जिला प्रशासन को देना जरूरी है। खास बात ये है कि उत्तराखंड में नैनीताल हाई कोर्ट को भूमि कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन के लिए अधिकृत किया हुआ है और हाई कोर्ट ने हर जिले में इस मामले में एक कमेटी बनाए जाने की व्यवस्था दी हुई है। इसी क्रम में राज्य की धामी सरकार ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया हुआ है।
डीएम ने क्या कहा?
हरिद्वार के डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि सुल्तानपुर में निर्माणाधीन मस्जिद का काम रुकवा दिया गया है, मस्जिद के भूमि और निर्माण संबंधी दस्तावेज़ दिखाने के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है।
फंडिंग की जांच भी हो?
हरिद्वार जिले में इतनी विशाल मस्जिद बनाए जाने पर चिंता जाहिर करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता पंकज चौहान ने बताया कि इस निर्माण को लेकर अखाड़ा परिषद व संत समाज में चिंता है जिससे की राज्य सरकार तक बात पहुंचाई गई है। इस विशाल मस्जिद को बनाने वालों को किन-किन से फंडिंग कर रहा है? उम्मीद है कि राज्य की धामी सरकार इस बारे में कार्रवाई करेगी।




