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उत्तराखंड सरकार की अकर्मण्यता से शिक्षा व्यवस्था चरमराई, राजकीय शिक्षक संघ की हड़ताल से नौनिहालों की पढ़ाई प्रभावित

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उत्तराखंड सरकार की अकर्णमता के कारण राजकीय शिक्षक संघ की हड़ताल जो विगत ४ दिनों से चल रही है उसका खामियाजा यहाँ के नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है। यह बात उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता पूर्व दर्जा राज्य मंत्री डॉ उपाध्याय ने प्रेस विज्ञप्ति में जारी करते हुए कहीं कि उत्तराखंड सरकार की ग़लत नीतियों के कारण शिक्षक कर्मचारियों में रोष व्याप्त हो रहा है तथा ये प्रदेश हड़ताली प्रदेश बनता जा रहा है।

आख़िर क्यो नहीं सरकार राजकीय शिक्षा संघ की बात को सुनती है विगत ८ सालो से सरकार प्रवक्ता प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य की पदोन्नति नहीं कर पा रही है । इस बीच में सैकड़ो शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया है और वो अब रिटायर भी हो गए है। आज उत्तराखंड के राजकीय इंटर कॉलेज में १३०० से अधिक पद केवल प्रधानाचार्यों के खाली है, क्या बिना प्रधानाचार्य के किसी विद्यालय की कल्पना की जा सकती है । इसी प्रकार पूरे उत्तराखंड प्राथमिक से ले कर हाईस्कूल तक के विद्यालयो में हजारों पद बिना प्रधानाध्यापक के चल रहे है ।मुखिया विहीन विद्यालय चलाकर सरकार क्या साबित करना चाहती है ।शिक्षा बड़ा ही गंभीर मुद्दा है पर सरकार इस और अपना ध्यान देना उचित नहीं समझती है।

शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत जी शिक्षा विभाग के अलावा जितने भी और विभागों की स्थिति बहुत खराब है । आज सरकार की नाकामी की वजह से मजबूर होकर कर्मचारी और अन्य लोग हाईकोर्ट का रुख करते हैं । मंत्री के नाकामी के वजह से उत्तराखंड के जनमानस को इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है । मंत्री को चाहिए की वो शीघ्र हो शिक्षा प्रतिनिधियों से वार्ता कर इस गंभीर समस्या का समाधान करना चाहिए ताकि दूरस्थ व पहाड़ी क्षेत्रों में कोई भी विद्यालय प्रवक्ता प्रधानाध्यापक व प्रधानाचार्य पद से ना छूट पाए।

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सुरेश उपाध्याय

संपादक चारधाम एक्सप्रेस न्यूज़

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