अल्मोड़ा, उत्तराखंड | विशेष रिपोर्ट
भैंसियाछाना विकासखंड के अंतर्गत आने वाले कुंजा और कनखल गांवों के ग्रामीणों ने इस बार पंचायत चुनाव में मतदान न करने का ऐलान कर दिया है। गांव तक सड़क न पहुंचने से नाराज ग्रामीणों ने “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा बुलंद करते हुए प्रदर्शन किया और प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक सड़क निर्माण शुरू नहीं होता, वे किसी भी चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे।
हर चुनाव में छलावा, अब बर्दाश्त नहीं!
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चुनावी वादों में गांव को सड़क से जोड़ने की बात की जाती है, लेकिन हर बार यह वादा सिर्फ भाषणों और घोषणाओं तक ही सीमित रह जाता है। कुंजा और कनखल गांव के लोगों को आज भी खैरोला तक करीब पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है, जिससे बुजुर्ग, महिलाएं और मरीज बेहद परेशान हैं।
मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में
गांव में सड़क न होने की वजह से गंभीर रोगियों और प्रसव पीड़ित महिलाओं को डोली में ले जाना पड़ता है। बारिश और ठंड में हालात और भी ज्यादा बिगड़ जाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकार बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दे पा रही तो वोट क्यों दें?
प्रदर्शन में उमड़ा जनसैलाब
गांव में हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान प्रकाश कार्की, मुकेश कार्की, कृपाल कार्की, प्रताप कार्की, देवेंद्र सिंह, डिगर सिंह, सुजान सिंह, भूपेंद्र सिंह, किशन सिंह, भागुली देवी, धनूली देवी, रेवती देवी, सुमन कार्की, सरिता कार्की, दीपा देवी, गंगा देवी, बसंती देवी, कविता देवी, मंजू देवी, अभिषेक बोरा, नीरज बोरा, मदन नैनवाल, विवेक प्रसाद समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
प्रशासन से सीधा सवाल: कब बनेगी सड़क?
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है कि कब तक उनके गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा। अगर जल्द ही ठोस कार्य योजना नहीं बनी, तो पंचायत चुनाव में बहिष्कार के साथ बड़ा जन आंदोलन भी छेड़ा जा सकता है।





